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  #1  
Old 30th December 2016
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कुछ तान्त्रिक घटनाऐं

प्रिय मित्रो
एक नया सूत्र आरम्भ कर रहा हूॅ|

कृपया ध्यान दें :-
---------------
1- प्रस्तुत सभी घटनाऐ काॅपी पेस्ट की गयी हैं ।
2- इन घटनाओं का ढोंगी बाबा से कोई लेना देना नही है ।
3- यह घटनाएं सिर्फ मनोरंजन के उद्दे श्य से प्रस्तुत कर रहा हूॅ अतः जि न सज्जन को न पसंद हो वे इस सू त्र पर पधारने का कष्ट न करें।

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  #2  
Old 30th December 2016
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"सन्यासी"
रात के सवा बारह का
समय था। अमावश्या
की काली रात थी।
सुनसान सड़क पर
हमारी हार्ड टॉप जिप्सी
फर्राटे भरती हुवी यमुना
के किनारे की सड़क पर
भागी जा रही थी। सड़क
पर निशाचर जीव
जन्तुवो का भी नामो
निशान नहीं था। शायद
दिन भर मई की धुप के
थपेड़े खा के सभी अपने
रेन बसेरो में आराम कर
रहे थे। जिप्सी की
हेडलाइट में कुछ कीट
अवश्य अपनी
उपस्थित दर्ज करके
मानो ये इंगित करने की
कोशिश कर रहे थे की
हम इलाहाबाद का शहरी
इलाका छोड़ अब
बियावान के हवाले है।
बुजुर्ग ड्राइवर प्रह्लाद
सिंह यादव जी की
चौकस निगाहे सड़क पे
जमी हुवी थी। ६२ साल
की उम्र में भी वो बुजुर्ग
फौजी दम ख़म और
हिम्मत में आज के
सामान्य जवानों को मात
देते लगते थे।
शहरी छेत्र में सड़क
थोड़ी अच्छी थी तो मैंने
और दमन सिंह ने थोड़ी
झपकी ले ली थी। बस
अब तो खुली आँखों से
सड़क के गड्ढों के हवाले
थे !
कुछ अपने मित्र दमन
सिंह के बारे में बता दू।
मेरे हम उम्र , हम प्याला
हम निवाला मेरे जिगरी
दोस्त। बनारस हिन्दू
यूनिवर्सिटी के पढ़ाई के
दौरान शुरू हुवी दोस्ती
कब प्रगाढ़ होती चली
गई, पता ही न चला।
उन्होंने इतिहास से MA
किया फिर कुछ और
करने को न था तो
पीएचडी भी कर डाली।
अभी भारत के पुरततव
विभाग ने बड़े अफसर है।
प्राचीन इतिहास के
सम्बन्द में खोज का
अच्छा अनुभव रखते है.!
परा मानवीय विषयों में
खासी दिलचस्पी रखते
है।
दमन सिंह , पूरा नाम
श्री रिपुदमन सिंह ,
अपने नाम के अनुरुप
थोड़ा गुसैल स्वाभाव के
है। हा मूड में हुवे तो हँसा
हँसा के पेट में दर्द पैदा
कर दे। बस ईश्वर ने
दुनिया पर एक ही
उपकार किया। वो कहते
है न , भगवन गंजे को
नाख़ून नहीं देता। महाशय
एक दम सिकिया
पहलवान के सगे भाई
प्रतीत होते है. गुसैल
स्वाभाव। किसी की बात
सहन करना आता ही
नहीं महोदय को। वो तो
अपनी हेल्थ से मात खा
जाते है नहीं तो क्रुद्ध हो
गए तो जलजला ही ला दे
सरकार।
दमन सिंह ने ही मुझे
काशी से बुलाया था।
उन्हें खबर मिली थी की
मिल्कीपुर के शमशान के
आस पास एक सिद्ध
बाबा को भटकता देखा
गया है। पैरानॉर्मल
विषय में दिलचस्पी और
उनकी जिज्ञासा उन्हें
मुझे फ़ोन करने पर
मजबूर कर गई । तंत्र
मंत्र के मेरे शोध की
दिशा में कुछ
ज्ञानार्जन की
अभिलाषा में में भी भागा
चला आया। इन विषयों
पे दमन कभी अकेले आगे
नहीं बढ़ाते। में भी अपंने
तंत्र मंत्र के शोध
सम्बंधित अभियानों पर
सदा उनका साथ चाहता
हु।
मिल्की पुर पहुंचते
पहुंचते हमें सुबह के 2
बज गए। दमन ने एक
परिचित को फ़ोन कर
दिया था। वो सज्जन
हमारा इंतज़ार कर रहे थे।
रस्ते से ही खोज खबर
लेनी शुरू कर दी थी
उन्होंने। अब पहुंचने पर
रात की दो बजे खाने की
जिद पकड़ के बैठ गए।
बड़ी मुश्किल से हम
समझा पाए की हमने
खाना और पीना
इलाहबाद में कर लिया
है। हा ठंडा पानी और
इलाहाबादी पड़े को ना
नहीं कह सके। वैसे भी
पीने के कुछ समय बाद
जोरदार प्यास तो लगती
ही है। तीनो ने दो दो पड़े
खाये और एक एक
बोतल पानी खींच लिया।
हमारे सोने का इंतज़ाम
बाहर वाले कमरे में किया
गया था। प्रह्लाद सिंह
दालान में सो गए और
हम और दमन कमरे में
कूलर की पानी की फुहार
फेंकती जूट के खुशबु
वाली हवा में पसर लिए।
लेटते ही हमारे घोड़े कब
बिके पता ही न चला।
इस सूत्र में लिखे गए

Last edited by cobra1255 : 30th December 2016 at 02:49 PM. Reason: correction

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  #3  
Old 30th December 2016
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Friends
sorry for this type of font alignment . I will correct this next time.

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Old 30th December 2016
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सुबह जरा देर से ही नींद
खुली। रतन जी ने सत्तू
के पराठे और परवल की
सुखी सब्जी नाश्ते में
बनवाई थी। नास्ता
किया गया और हम लोग
आये अब मुद्दे पर। सोचा
क्यों न अपनी तलाश का
श्रीगणेश रतन जी से ही
किया जाये। रतन जी ४०
के फेटे में पहुंचे बलिष्ट
शरीर का व्यक्ति थे।
और अपने इलाके में रतन
पहलवान के नाम से जाने
जाते थे।
द्वार पर कुर्सियां डाली
हुवी थी , आमने सामने
बैठ कर वार्ताल!भ शुरू
हुवा।
रतन जी , सुना है कोई
सिद्ध बाबा इलाके में
आये हुवे है? ,,,,,, दमन ने
पूछा
सिद्ध बाबा ?,,,,,, अरे
तुम भी कहा कहा की सुन
लेते हो दमन भाई। ,,,,,
रतन जी बोले
भाई पक्की खबर है।
तभी तो पंडित जी को भी
खींच लाया में।,,,,, दमन
ने मेरी और इशारा किया
कही तुम उस शमशान
वाले पागल की तो न कह
रहे हो.? ,,,,,,,,,,,,रतन जी
तनिक चौक कर बोले
कुछ डिटेल में बताओ जी, तब तो कुछ पता पड़े
,,,,,,,,, दमन में टोक दिया
अरे डिटेल क्या , वो
पागल सा एक साधु है।
लोगो को देखा नहीं की
गाली देता रहता है।
पत्थर मारने को धमकता
है।

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  #5  
Old 30th December 2016
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इतना गन्दा है की
पास पहुंचो तो हैजाहो
जावे। रतन जी नाक भो
सुकोदते हुवे बोले।
करता क्या है। पहली
बार मैंने पूछा
करने का क्या है जी।
पागल आदमी , दिन भर
सोया रहता है शमशान
के काली मंदिर के सामने
वाले पेड़ के नीचे। कभी
कभी तो कुत्ते भी आ के
मुंह चाट जाते है। बस वो
तो मानो इंसानो से ही
खार खाये है। बाकी तो
कोई भी जानवर कुछ भी
कर ले। ,,,,,,, रतन जी ने
समझाया
कभी उसके रात के
क्रिया कलापो की कोई
जानकारी मिली क्या। ,,,, मुझे थोड़ी उत्सुकता
हुवी।
अब रात तो कौन जावे
शमशान में। फिर भी सुना
है वो पागल, जानवरों को
मार कर खा जाता है।
कुछ तो बोले की कच्चा
ही खावे है ।,,,,, रतन जी
ने बताया
जानवर मतलब ?,,,, मैंने
पूछा
ज्यादातर मुर्गी ही
मारता है। कुछ ने बताया
है की बकरा भी। बस
बकरा खाता नहीं। बस
भभूत छिड़क के शमशान
के कुत्तो के लिए डाल
देता है। रतन जी ने
बताया
मेरे मन में आया ,,,,,,,,
"महा भैरव भोज " , में
चौकन्ना हुवा थोड़ा

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  #6  
Old 30th December 2016
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कुछ तो कहे है की वो कटे
बकरे की गर्दन से मुंह
लगा के एक दो घुट
,,,,,,,,,,, रतन जी का मुंह
कहते कहते कसैला हो
गया
सुनते ही मेरी आँखे चौड़ी
सी हो आयी , रीढ़ की
हड्डी में एक ठंडी लहर
सी दौड़ पड़ी , ,,,, मन में
विचार कौंध गया !!!!!!!!!!
कही माँ छिन्नमस्ता का
पुजारी तो नहीं ,,,,,,, हे
बाबा विश्वनाथ , रक्छा
करना

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  #7  
Old 30th December 2016
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मैंने सोच में पहलू बदला
तो रतन जी मेरी तरफ
मूड कर बोले , ,, अजी
पूरा पागल है पंडित जी।
कोई फायदा नहीं उससे
मिलने जाने का। व्यर्थ
की गाली गलोज होगी वो
अलग से।
कोई बात नहीं रतन जी ,
अब जब यहाँ तक आ ही
गए है तो क्यों न
मुलाकात कर ली जाये
,,,,, मैंने मन में घुमड़ते
प्रश्नों के बीच अपना
पक्छ रखा
दमन तो वैसे भी कोई
मौका नहीं छोड़ते
,,,,,,,,,,,,,,,,,,, अब इतनी
दूर आये है तो बाबे को
नापे बगैर तो न जाऊ में।
अब मिलना धाण ही चुके
है आप लोग तो चलो
जी फिर देर किस बात
की है। दोपहर के भोजन
के पश्च्यात निकल
पड़ते है। ,,,,,,,, रतन जी बोल उठे विलम्ब से उठने के कारन नाश्ते पानी में ही
साढ़े ११ हो गए थे. हमने रतन जी की भोजन की बात मान ली।
फिर हैंड पंप के शीतल जल से स्नान इत्यादि किया गया। और जम गए जी भोजन पर। स्वादिस्ट चावल के साथ अरहर के देसी घी में तड़के वाली दाल बनाई गई थी। साथ में आलू की भुजिया। आम के अचार और घर के बने पापड़ों के साथ। बस खाने का मजा ही आ गया।

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  #8  
Old 30th December 2016
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निकलने को हुवे तो दमन जी नट गए। अरे भाई अब इतनी तेज़ धुप में कहा
भटकेंगे । बाहर निकलते ही पॉपकॉर्न
की तरह भून जाएंगे। रतन जी ने उन्हें छेड़ा , दमन जी पॉपकॉर्न की तरह या "पापड़ " की तरह। ,,,,,, उनका इशारा
दमन के दुबलेपन की तरफ था
शुकर है जी , कद्दू की तरह तो नहीं फुट जाएंगे न ,,,,,, उनका इशारा रतन जी के बलिष्ट शरीर से उभरती तोंद की तरफ था चलो जी कोई बात नहीं,न पापड़ सिकवाओ न ही कद्दू का बेडा गर्क करो, एक दो घंटे लोट ही लेते है , दमन जी ने मानो फैसला सा सुनाया भरा पेट और मई की दोपहर की गर्मी का मेल
हुवा तो मन थोड़ा अलसा सा गया। जी लोट लिए हम सभी और कुछ ही देर
में बजने लगी खर्राटों की सरगम
शाम हुवी , सूर्य देव का अग्नि रथ का तेज़ तनिक मंद पड़ा , गर्मी अब भी जानलेवा ही थी। रतन जी ने मट्ठे का इंतज़ाम करवाया था भुना जीरा डाल के। खींच गए हम सब दो दो गिलास और
फिर चल पड़ी जिप्सी रतन जी बताये रस्ते पर।

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Old 30th December 2016
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चलने के पहले मैंने और दमन नें गुरु विजयानंद का दिया तांबे का अभिमंत्रित सिक्का अपनी अपनी जेबो में रख लिया। ये अति प्राचीन तांबे के अभिमंत्रितसिक्के रक्छा कवच के लिए अद्भुत है। कोई बड़ी शक्ति ही इन्हे भेद कर अहित करने की सोचे तोसोचे , साधारण भूत
प्रेत तो इनका आभास पाते ही भाग खड़े होते है।
रात्रि कालीन शमशान की खोज यात्राओं में मैंने इन्हे बड़ा उपयोगी पाया
है। कोई विशेष तैयारी नहीं की मैंने क्योकि मुझे कोई खास खतरा नहीं
दिख रहा था अभी। वो सन्यासी कोई महापुजारी भी हो सकता था और एक मेडिकल केस भी।
,,,,

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